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एम्स ऋषिकेश में अब और सटीक होगी जांच: बोइंग इंडिया ने दी अत्याधुनिक मशीनों की सौगात, सालाना 15,000 मरीजों को मिलेगा लाभ

अल्ट्रासाउंड और डिजिटल एक्स-रे की नई तकनीक से जांच में नहीं होगी देरी; एम्स निदेशक डॉ. मीनू सिंह और सलिल गुप्ते ने किया नई सुविधाओं का उद्घाटन

ऋषिकेश। उत्तराखंड के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। एम्स ऋषिकेश (AIIMS Rishikesh) में अब रोगों की पहचान और भी सटीक व तीव्र गति से हो सकेगी। विमानन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी बोइंग इंडिया (Boeing India) ने अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (CSR) के तहत संस्थान को अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक उपकरण उपलब्ध कराए हैं। इस पहल से न केवल अस्पताल की जांच क्षमता बढ़ेगी, बल्कि हर साल हजारों मरीजों को लंबी वेटिंग लिस्ट से भी निजात मिलेगी।

तकनीक से मिलेगी नई रफ्तार: AERB मानकों वाली मशीनें

एम्स परिसर में स्थापित किए गए इन नए संसाधनों में परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) के कड़े मानकों पर खरी उतरने वाली हाई-एंड अल्ट्रासाउंड मशीन और डिजिटल एक्स-रे सिस्टम शामिल हैं।

  • त्वरित परिणाम: डिजिटल एक्स-रे प्रणाली से रिपोर्टिंग का समय कम होगा।

  • सटीक डायग्नोसिस: अत्याधुनिक अल्ट्रासाउंड तकनीक से जटिल बीमारियों की शुरुआती पहचान आसान होगी।

  • बड़ा लाभ: अनुमान है कि इस नई सुविधा का लाभ प्रतिवर्ष 15,000 से अधिक मरीजों को सीधे तौर पर मिलेगा।

“बेहतर स्वास्थ्य ही मजबूत समाज की नींव”

उपकरणों के उद्घाटन के अवसर पर बोइंग इंडिया एवं दक्षिण एशिया के अध्यक्ष सलिल गुप्ते ने कहा:

“उच्च गुणवत्ता वाली डायग्नोस्टिक सेवाएं किसी भी उपचार की आधारशिला होती हैं। हमें विश्वास है कि यह अत्याधुनिक तकनीक स्थानीय समुदाय के स्वास्थ्य परिणामों में सकारात्मक बदलाव लाएगी।”

वहीं, एम्स ऋषिकेश की कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ डॉ. मीनू सिंह ने इस सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि नई इमेजिंग सुविधाओं के जुड़ने से क्लीनिकल निर्णय लेने में मजबूती आएगी और मरीजों के उपचार में होने वाली देरी कम होगी।


2020 से जारी है बोइंग और ‘डॉक्टर्स फॉर यू’ का साथ

बोइंग इंडिया और Doctors For You के बीच यह साझेदारी कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू हुई थी।

  • विस्तार: वर्तमान में यह पहल देश के 14 राज्यों तक पहुंच चुकी है।

  • योगदान: इसके तहत अब तक विभिन्न शहरों में सीटी स्कैन मशीनें, एम्बुलेंस सेवाएं और ऑक्सीजन प्लांट जैसी जीवनरक्षक सुविधाएं स्थापित की जा चुकी हैं।

  • स्थानीय प्रभाव: डॉ. रजत जैन के अनुसार, इस तरह के संसाधनों से टियर-2 शहरों में भी विश्वस्तरीय जांच सुविधाएं जमीनी स्तर तक पहुंच रही हैं।


न्यूज पोर्टल विश्लेषण: क्यों खास है यह पहल?

एम्स ऋषिकेश पर उत्तराखंड के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के मरीजों का भारी दबाव रहता है। जांच मशीनों की संख्या बढ़ने से मरीजों को निजी लैब में जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और उन्हें संस्थान के भीतर ही रियायती दरों पर उत्कृष्ट सेवाएं मिल सकेंगी।

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