राष्ट्रीयसमाचार

कर्तव्य पथ पर गूंजा ‘गगनयान’ का गौरव: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ‘अशोक चक्र’ से सम्मानित

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंचने वाले पहले भारतीय बने शुभांशु; राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वीरता और विज्ञान के इस अद्भुत संगम को दिया देश का सर्वोच्च सम्मान

नई दिल्ली: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर एक ऐतिहासिक दृश्य दिखाई दिया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को देश के सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार ‘अशोक चक्र’ से अलंकृत किया। यह सम्मान न केवल उनकी वीरता का प्रतीक है, बल्कि भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नए स्वर्ण युग की शुरुआत भी है।

41 साल बाद अंतरिक्ष में भारत की नई उड़ान

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने जून 2025 में वह कारनामा कर दिखाया, जिसका भारत को दशकों से इंतजार था। एक्सिओम मिशन-4 (Axiom-4) के तहत उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक सफल यात्रा की।

  • वे ISS पर कदम रखने वाले पहले भारतीय बने।

  • राकेश शर्मा (1984) के बाद अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले वे दूसरे भारतीय बन गए हैं।

  • अंतरिक्ष में 18 दिनों तक रहकर उन्होंने जटिल वैज्ञानिक प्रयोगों को अंजाम दिया, जिसकी अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भी सराहना की।

फाइटर पायलट से ‘स्पेस पायनियर’ तक का सफर

लखनऊ के रहने वाले शुभांशु शुक्ला का वायुसेना से अंतरिक्ष तक का सफर साहस और तकनीकी दक्षता की मिसाल है:

  • अनुभव: 2,000 घंटे से अधिक की उड़ान का अनुभव।

  • कौशल: सुखोई-30 MKI, मिग-29 और जगुआर जैसे घातक लड़ाकू विमानों के माहिर पायलट।

  • कमीशन: वर्ष 2006 में वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए। इस मिशन में उन्होंने ‘पायलट’ की मुख्य भूमिका निभाई, जो वैश्विक स्तर पर इसरो (ISRO) और भारतीय पायलटों की बढ़ती साख को दर्शाता है।

वैश्विक अंतरिक्ष मंच पर भारत की धमक

नासा (NASA), यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) और इसरो की साझेदारी वाले इस मिशन ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा कर दिया है, जिनके पास मानव अंतरिक्ष उड़ान की उत्कृष्ट क्षमता है। शुभांशु की यह उपलब्धि आगामी ‘गगनयान’ मिशन के लिए भी एक बड़ा बूस्टर साबित होगी।


संपादकीय टिप्पणी: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र हर उस भारतीय युवा के लिए एक संदेश है जो सितारों तक पहुँचने का सपना देखता है। यह सम्मान विज्ञान, साहस और राष्ट्रभक्ति का एक अद्भुत समागम है।

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